शिवपुरी के सतनबाड़ा पुलिस की गुंडागर्दी: न्याय मांगने गए गरीब को मिली धमकी, खाकी के रक्षक ही बने भक्षक!
शिवपुरी से ऋषि गोस्वामी की रिपोर्ट
शिवपुरी सतनबाड़ा | 'पुलिस-प्रशासन आपकी सेवा में'—यह स्लोगन सतनबाड़ा थाने की दीवारों पर भले ही चमक रहा हो, लेकिन हकीकत की जमीन पर यह नारा दम तोड़ता नजर आ रहा है। थाने की दहलीज पर न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले एक गरीब फरियादी के साथ जिस तरह का अमानवीय और दबंग व्यवहार किया गया, उसने पुलिस की संवेदनशीलता की कलई खोल दी है।
फरियाद लेकर गया था पीड़ित, मिली 'वर्दी' की धौंस
मिली जानकारी के अनुसार, जब एक आम नागरिक अपनी व्यथा सुनाने थाने पहुंचा, तो पुलिस ने उसे कानूनी मदद देने के बजाय धमकी और दुर्व्यवहार का 'प्रसाद' दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि थाना प्रभारी का लहजा एक लोक सेवक जैसा कम और किसी 'डॉन' जैसा ज्यादा नजर आ रहा था। सतनबाड़ा पुलिस का यह चेहरा देखकर जनता अब पूछ रही है कि—क्या गरीब होना ही सबसे बड़ा गुनाह है?
प्रधान आरक्षक की दबंगई और प्रभारी की 'रहस्यमयी' चुप्पी
क्षेत्र में चर्चा है कि प्रधान आरक्षक सोनू रजक और थाना प्रभारी द्वारा फरियादियों को डराना-धमकाना अब आम बात हो गई है। प्रक्रिया से अनजान गरीब जनता को सही रास्ता दिखाने के बजाय, उन्हें उनकी कमियों पर टोकने के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर थाना प्रभारी इस पूरे मामले पर मौन क्यों हैं? क्या यह चुप्पी किसी बड़ी लापरवाही को छिपाने की ढाल है या फिर आम जनता की आवाज को कुचलने की रणनीति?
जनता में भारी आक्रोश, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
सतनबाड़ा पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने पुलिस विभाग की छवि को धूमिल कर दिया है। रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में नजर आएं, तो आम आदमी किसके पास जाए? क्षेत्र की जनता अब प्रशासन के आला अधिकारियों से मांग कर रही है कि:
दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
थाने में आने वाले हर व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित हो।
वर्दी की आड़ में चल रही दबंगई पर लगाम कसी जाए।

