UNSC में भारत की अपील: क्षेत्रीय संघर्षों से वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरा, विकासशील देशों पर पड़ रहा बुरा असर
नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से संघर्षों के कारण पैदा होने वाले मानवीय संकट को कम करने को अपनी पहली प्राथमिकता बनाने की अपील की है। भारत ने चेताया कि ऊर्जा, उर्वरक, समुद्री परिवहन और कृषि व्यापार में रुकावटें वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर आयात पर निर्भर विकासशील देशों पर पड़ रहा है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यूक्रेन, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से जुड़ी परिस्थितियों को खाद्य आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर और जहाजों के सत्यापन की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को कहा कि आजकल के संघर्षों का असर केवल लड़ाई वाली जगहों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूर-दूर तक फैलता है। ऊर्जा बाजार, उर्वरक की आपूर्ति, समुद्री परिवहन, मानवीय सहायता पहुंचाने की व्यवस्था और कृषि व्यापार में रुकावटों ने दिखाया है कि क्षेत्रीय संघर्ष किस तरह दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
सुरक्षा परिषद में फूड अंडर फायर: ग्लोबल और लोकल फूड संकट को कम करने में सुरक्षा परिषद की भूमिका विषय पर हुई खुली बहस में पी. हरीश ने कहा कि जो विकासशील देश खाद्य आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं, उन्हें इन रुकावटों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। परिषद की पहली प्राथमिकता संघर्ष से होने वाले मानवीय संकट को कम करना होना चाहिए। इसके लिए सुरक्षित, तेज और बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुंचाने की सुविधा देनी होगी और संघर्ष-रोधी इंतजामों में मदद करनी होगी।
साभार अमर उजाला

