मलेशिया की ब्रह्मोस मिसाइल में दिलचस्पी: भारत के साथ रक्षा संबंधों को मिलेगी नई ऊंचाई
नई दिल्ली। भारत और मलेशिया के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मलेशिया ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी संभावित खरीद से मलेशिया अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर निर्भरता कम कर सकता है। हालांकि अभी यह संभावित खरीद में रुचि है और इसे अंतिम रक्षा सौदा नहीं माना जा सकता। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ कमलेश कुमार के अनुसार, भारत के साथ करीबी सहयोग मलेशिया को एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सुरक्षा साझेदार उपलब्ध करा सकता है, बिना उसे किसी एक शक्ति खेमे में पूरी तरह जाने की जरूरत पड़े।
उनके मुताबिक, रक्षा साझेदारियों में विविधता लाना मलेशिया की रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने का एक तरीका हो सकता है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता और बहुउपयोगिता को देखते हुए इसकी संभावित तैनाती से दक्षिण चीन सागर में मलेशिया की प्रतिरोधक क्षमता को लेकर दूसरे देशों की धारणा प्रभावित हो सकती है। दक्षिण चीन सागर में चीन और मलेशिया के बीच कुछ समुद्री क्षेत्रों को लेकर दावे जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि मलेशिया को किसी संभावित खरीद के उद्देश्य को लेकर स्पष्ट संदेश देना होगा, ताकि इसे किसी खास देश को निशाना बनाने की तैयारी के रूप में न देखा जाए। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। मलेशिया ने इसमें साझेदार देश के रूप में भाग लिया।
साभार पंजाब केसरी

