MP में 'सुपर संडे' से पहले महा-बदलाव की तैयारी: 18 जिलों के कलेक्टर और 20 SP बदले जाएंगे
ऋषि गोस्वामी की रिपोर्ट
भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार प्रशासन की धार पैनी करने के लिए एक बड़ी "सर्जिकल स्ट्राइक" की तैयारी में है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ट्रांसफर की यह सूची किसी भी वक्त जारी हो सकती है।
भोपाल को मिल सकती है नई 'महिला कलेक्टर'
राजधानी भोपाल में प्रशासनिक नेतृत्व बदलने की चर्चाएं सबसे अधिक गर्म हैं। वर्तमान कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को शासन किसी बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाज सकता है। वहीं, उनके उत्तराधिकारी के तौर पर प्रियंक मिश्रा या किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी का नाम रेस में सबसे आगे है। सरकार का स्पष्ट विजन है कि महानगरों में महिला नेतृत्व को मौका देकर प्रशासनिक संवेदनशीलता को बढ़ाया जाए।
फील्ड और मंत्रालय के बीच 'क्रॉस-एक्सचेंज'
इस बार की तबादला नीति केवल रूटीन फेरबदल नहीं है, बल्कि यह परफॉर्मेंस-बेस्ड शिफ्टिंग है।
मंत्रालय वापसी: नर्मदापुरम, ग्वालियर, रीवा और इंदौर जैसे बड़े जिलों के कलेक्टरों को वल्लभ भवन (सचिवालय) बुलाकर अहम विभागों की कमान सौंपी जा सकती है।
फील्ड पोस्टिंग: मंत्रालय में लंबे समय से पदस्थ कुछ तेजतर्रार अधिकारियों को जिलों में कलेक्टर बनाकर भेजा जा रहा है ताकि सरकार की योजनाओं में गति आए।
CMO और पुलिस महकमे में भी 'क्लीन स्वीप'
बदलाव की यह बयार मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक भी पहुंचेगी। सचिव स्तर के अधिकारियों के विभागों में फेरबदल की संभावना है। वहीं, पुलिस महकमे में भी 20 जिलों के कप्तान (SP) बदले जाने तय हैं। विशेषकर भिंड, धार, और झाबुआ जैसे संवेदनशील जिलों में नए चेहरों की तैनाती की जाएगी।
"मुख्यमंत्री मोहन यादव का लक्ष्य स्पष्ट है—प्रशासनिक सुस्ती को खत्म करना और 'रिजल्ट ओरिएंटेड' अफसरों को फ्रंटलाइन पर लाना। जो अफसर जनता की समस्याओं और विकास कार्यों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें लूप लाइन में भेजा जाना लगभग तय है।"

