नगर एवं  ग्रामीण अंचलों में अभिभावकों की लापरवाही पड़ रही भारी, नाबालिग दौड़ा रहे तेज रफ्तार बाइक बढ़ रहा हादसों का खतरा

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दिलीप पाटीदार 
सरदारपुर।  नगर से लगा के ग्रामीण अंचलों में नाबालिग बच्चों द्वारा तेज रफ्तार से दोपहिया वाहन चलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कम उम्र में वाहन चलाने वाले बच्चे न केवल अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि राहगीरों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद कई अभिभावक अपने बच्चों को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक सौंप रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती जा रही है।
राजगढ़ सरदारपुर के क्षेत्रों में भी अक्सर देखा जाता है कि स्कूली छात्र और किशोर बिना हेलमेट के तेज गति से बाइक चलाते हैं। कई बार वे यातायात नियमों की अनदेखी करते हुए स्टंटबाजी और लापरवाही से वाहन चलाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र और अनुभव की कमी के कारण नाबालिग वाहन चालक आपात स्थिति में सही निर्णय नहीं ले पाते, जिससे दुर्घटनाएं होने की संभावना अधिक रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नाबालिग बच्चों को वाहन उपलब्ध कराने में अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि माता-पिता स्वयं अपने बच्चों को बाइक चलाने की अनुमति देते हैं, तो उन्हें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। लोगों का मानना है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में केवल बच्चों को समझाइश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके अभिभावकों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
यातायात नियमों के अनुसार नाबालिग द्वारा वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में वाहन मालिक और अभिभावक भी जिम्मेदार माने जा सकते हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर नाबालिग वाहन चालकों पर रोक लगाने तथा अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नाबालिगों को वाहन चलाने की अनुमति देने वाले अभिभावकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके। उनका कहना है कि जब तक अभिभावक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सड़क दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता, अभिभावकों की जिम्मेदारी और कानून का कड़ाई से पालन ही इस समस्या का प्रभावी समाधान हो सकता है। इससे न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि युवाओं में सुरक्षित और जिम्मेदार यातायात व्यवहार भी विकसित होगा।

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