​बिना सहमति स्मार्ट मीटर थोपने के खिलाफ फूटा आक्रोश; बिजली मंडल के C.M.D. को सौंपा ज्ञापन

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सह संपादक दीपक वाड़ेकर 
​इंदौर। शहर में बिजली उपभोक्ताओं पर बिना उनकी सहमति के जबरन स्मार्ट मीटर थोपने के विरोध में अब कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व वरिष्ठ महामंत्री रोहिताश शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के सी.एम.डी. (C.M.D.) को ज्ञापन सौंपकर निजी कंपनियों की 'गुंडागर्दी' को तुरंत रोकने की मांग की है।
​निजी कंपनियों पर 'धमकाने' का आरोप
​ज्ञापन में रोहिताश शर्मा, विपिन शर्मा और विजय जाधव ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि निजी कंपनियों के कर्मचारी और ठेकेदार उपभोक्ताओं के घरों पर जाकर उन्हें डरा-धमका रहे हैं। आरोप है कि उपभोक्ताओं पर बिजली कनेक्शन काटने का दबाव बनाया जा रहा है और कई मामलों में तो दादागिरी कर जबरन मीटर लगाए जा रहे हैं।
​नियमों का हवाला: उपभोक्ता की सहमति अनिवार्य
​रोहिताश शर्मा ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा संसद में दिए गए लिखित जवाब और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि:
​बिना उपभोक्ता की सहमति के स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता।
​मीटर का चयन करना उपभोक्ता का अधिकार है।
​जबरन मीटर लगाने का कोई भी सरकारी नियम अस्तित्व में नहीं है।
​इन क्षेत्रों में बढ़ी परेशानी
​शिकायत में मुख्य रूप से शीतल नगर, भाग्यश्री कॉलोनी, सुमन नगर और गंगादेवी नगर (विजय नगर क्षेत्र) का जिक्र किया गया है। यहाँ के निवासियों—राधेश्याम यादव, कैलाशचंद्र दुबे, बबुल यादव और श्रीमती इंदिरा प्रजापत सहित दर्जनों नागरिकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे समय पर बिल, एनर्जी चार्ज और टैक्स जमा करते हैं, इसके बावजूद उन्हें जेल भेजने या लाइट काटने की धमकी दी जा रही है।

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