समान नागरिक संहिता पर जनपरामर्श बैठक आयोजित, विभिन्न वर्गों से प्राप्त हुए सुझाव
यूसीसी पर जनपरामर्श बैठक में मिले महत्वपूर्ण सुझाव, सभी वर्गों की सहभागिता से तैयार होगा प्रारूप
रिपोर्टर :- सलीम हुसैन
झाबुआ। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा जनसुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से रविवार को पूर्वान्ह 11:00 बजे कृषक सभागृह, कृषि विज्ञान केन्द्र, राजगढ़ नाका, झाबुआ में जनपरामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च स्तरीय समिति की सदस्य एवं शिक्षाविद् डॉ. शोभा पैठणकर उपस्थित रहीं तथा विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से सुझाव एवं विचार प्राप्त किए गए।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. शोभा पैठणकर ने कहा कि समान नागरिक संहिता का प्रावधान भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद-44 में किया गया है। उन्होंने बताया कि मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों की प्रकृति भिन्न होने के बावजूद दोनों का उद्देश्य नागरिकों के कल्याण, समानता एवं न्यायपूर्ण व्यवस्था को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान इस विषय पर व्यापक चर्चा हुई थी तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया था। समय के साथ समाज में परिवर्तन होते हैं और आवश्यकतानुसार कानूनों में भी संशोधन किए जाते हैं। परिवर्तन जीवन का स्वाभाविक अंग है।
डॉ. पैठणकर ने कहा कि वर्तमान में विवाह, विवाह विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं दत्तक ग्रहण जैसे विषय विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य इन विषयों पर सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे महिला एवं पुरुष दोनों को समान अधिकार एवं अवसर प्राप्त हो सकें।
डॉ. पैठणकर ने कहा कि राज्य शासन जनसंवाद एवं जनपरामर्श के माध्यम से नागरिकों के सुझाव प्राप्त कर रहा है। जो नागरिक बैठक में उपस्थित नहीं हो सके हैं, वे ucc.mp.gov.in वेबसाइट के माध्यम से भी अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने सभी वर्गों से रचनात्मक सुझाव देने का आग्रह किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में अनुसूचित जनजातियों को शामिल नहीं किए जाने का प्रावधान विचाराधीन है। प्राप्त सुझावों के आधार पर यूसीसी का प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे विधि विभाग की सहमति के उपरांत विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों की राष्ट्र के प्रति निष्ठा समान है और समाज के विभिन्न वर्गों के विचारों को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा समान नागरिक संहिता के संबंध में आमजन के सुझाव प्राप्त करने के लिए व्यापक स्तर पर जनपरामर्श की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। शासन की मंशा है कि विभिन्न वर्गों, समुदायों एवं क्षेत्रों के नागरिकों की राय प्राप्त कर उसे नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए, जिससे अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी निर्णय लिए जा सकें।
कलेक्टर ने जिले के नागरिकों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित जनपरामर्श प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता करें तथा अपने सुझाव एवं विचार प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि जो नागरिक बैठक में उपस्थित नहीं हो सके हैं, उनके लिए शासन द्वारा ucc.mp.gov.in वेबसाइट भी उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से वे अपने सुझाव ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आधारशिला है और नागरिकों के सुझाव नीति निर्माण को अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार ने कहा कि समाज में व्यवस्था, न्याय एवं कानून के प्रभावी संचालन के लिए शासन द्वारा विभिन्न विधिक प्रावधान बनाए गए हैं। आपराधिक कानून का उद्देश्य समाज में शांति, सुरक्षा एवं कानून का राज स्थापित करना है, वहीं नागरिक जीवन से जुड़े विषयों के लिए सिविल कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि विवाह, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार, भरण-पोषण एवं अन्य नागरिक विषयों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों में मौजूद असमानताओं को दूर करने तथा सभी नागरिकों के लिए समानता आधारित व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता पर विचार किया जा रहा है। यूसीसी के माध्यम से उन विषयों को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनमें समयानुकूल सुधार एवं एकरूपता की आवश्यकता महसूस की गई है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक एवं कानूनी मुद्दों के समाधान के विकल्प के रूप में यूसीसी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था सिद्ध हो सकती है। इसलिए नागरिकों को इस विषय का गंभीरता से अध्ययन कर अपने सुझाव प्रस्तुत करने चाहिए।
जनसंवाद के माध्यम से प्राप्त हुए विविध सुझाव एवं विचार
बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के सदस्यों, अधिवक्ताओं एवं पत्रकार बंधुओं द्वारा समान नागरिक संहिता के संबंध में अपने-अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए गए।
प्रतिभागियों ने सामाजिक सरोकारों एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सुझावों में विवाह एवं विवाह विच्छेद के लिए सभी नागरिकों हेतु एक समान कानून बनाए जाने, विवाह के लिए महिला एवं पुरुष की आयु समान निर्धारित किए जाने तथा महिलाओं के उत्तराधिकार संबंधी नियमों में समानता सुनिश्चित किए जाने पर बल दिया गया।
बैठक में जनजातीय समाज की विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं एवं रीति-रिवाजों की भिन्नता को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें यूसीसी के दायरे से पृथक रखने तथा जनजातीय वर्ग के लिए पृथक विधिक प्रावधान अथवा अलग कोड तैयार किए जाने संबंधी सुझाव भी प्राप्त हुए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि विकास की मुख्यधारा में जनजातीय वर्ग की भागीदारी एवं हित किसी भी स्थिति में प्रभावित न हों।
प्रतिभागियों द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों एवं सिंगल मदर के बच्चों के उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों को स्पष्ट एवं न्यायसंगत रूप से परिभाषित किए जाने की आवश्यकता व्यक्त की गई। इसके अतिरिक्त नागरिकों को कानूनों की स्पष्ट जानकारी एवं समझ उपलब्ध कराने के लिए सहायता केंद्र स्थापित किए जाने तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाने का सुझाव भी दिया गया।
बैठक में यह भी सुझाव सामने आया कि यूसीसी का प्रारूप पूर्ण पारदर्शिता के साथ तैयार किया जाए तथा विषय के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिए स्थानीय स्तर पर समितियों का गठन किया जाए। प्रतिभागियों ने यह भी सुझाव दिया कि जिन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है, वहां इसके सामाजिक एवं प्रशासनिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन कर उसके अनुभवों को नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
- इस दौरान सहायक कलेक्टर आयुषी बंसल, अपर कलेक्टर सी एस सोलंकी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व झाबुआ महेश मण्डलोई एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी तथा नागरिक उपस्थित रहे

