सुकवा रैय्यत में पुलिया निर्माण पर सवाल, तीन दिन में काम पूरा करने का दावा; ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई

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संवाददाता :- पुनीत सेन
खंडवा/खालवा। ग्राम पंचायत सुकवी रैय्यत के अंतर्गत ग्राम सुकवा रैय्यत से मोहनिया मार्ग के मध्य चल रहे पुलिया निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 6 लाख रुपये की लागत से तैयार की जा रही पुलिया का निर्माण महज तीन दिनों में कर दिया गया और निर्माण में गुणवत्ता के मानकों का पालन नहीं किया गया।

ग्रामीणों के अनुसार पुलिया निर्माण में मजबूत आधार तैयार करना आवश्यक होता है, लेकिन मौके पर पाइप डालने से पहले पर्याप्त बेस एवं कंक्रीट का कार्य नहीं किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पाइपों को सीधे जमीन पर रखकर मिट्टी से दबाया गया है तो भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान जमीन धंसने और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रह सकती है।

काली रेत के इस्तेमाल का आरोप

ग्रामीणों ने निर्माण में मिट्टी मिली काली रेत तथा घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा पुलिया के दोनों ओर सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा खंभे नहीं बनाए जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की जांच किए बिना जल्दबाजी में काम पूरा किया गया। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच और निर्माण रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पंचायत के अन्य विकास कार्यों पर भी सवाल

ग्रामीणों ने SDM, खालवा को दिए आवेदन में ग्राम पंचायत के अन्य विकास कार्यों को लेकर भी शिकायत की है। आवेदन में ग्राम सभा के नियमित आयोजन, पंचायत के विकास कार्यों की जानकारी ग्रामीणों को नहीं मिलने, साफ-सफाई, सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति तथा कथित कागजी विकास कार्यों की जांच की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में शिकायत या अनियमितताओं की जानकारी देने पर उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में भी ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा सच

ग्रामीणों ने SDM से मांग की है कि ग्राम सुकवा रैय्यत में हुए विकास कार्यों की स्थल जांच, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच, स्वीकृत राशि, माप पुस्तिका (MB), कार्य आदेश, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए।

अब सवाल यह है कि करीब 6 लाख रुपये की लागत वाली पुलिया का निर्माण किस तकनीकी स्वीकृति और अनुमान के आधार पर किया गया? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित बेस, सामग्री और तकनीकी मानकों का पालन हुआ? और क्या भुगतान वास्तविक कार्य की मात्रा एवं गुणवत्ता के अनुरूप किया गया?

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

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