अज्ञान के अंधकार को हटाकर अंतःकरण को प्रकाशित करता है सहजयोग ध्यान
ज्ञान रुपी चक्षु कोई भी जन्म से ही लेकर नहीं पैदा होता। और न ही इसे कोई स्वयं अपने बलबूते पर धारण कर सकता है। इसे धारण करने के लिए किसी ज्ञानी का सानिध्य जरूरी है। यहां तक कि राम चंद्र जी जैसे अवतरित महापुरुष ने भी इस ज्ञान रूपी चक्षु को धारण करने के लिए ॠषि मुनियों का ही आशीर्वाद लिया था।
और आम जन की यह किस्मत पर निर्भर करता है कि उसे जीवन भर कोई ऐसा संग मिल भी पाता है या नहीं। कई बार हमारी आंखों के सामने राह होती है और हम पहचान नहीं पाते हैं।
ज्ञान अर्जित महानुभावों का कहना है कि प्रत्येक मनुष्य में ज्ञान होता है किन्तु अज्ञान उसे आच्छादित किये रहता है। उस अज्ञान के हटने पर ही मनुष्य को ज्ञान की अनुभूति होती है और अज्ञान तभी हटता है जब मनुष्य का अंत:करण पूर्णतः शुद्ध हो। ब्रम्हज्ञान पाने का अधिकारी केवल वही साधक है जिसका अंत:करण शुद्ध होगा।
सहज योग ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे नाड़ियों व चक्रों की शुद्धता होती है भय, अहंकार और क्रोध को त्यागकर ही हम पूर्णतः शुद्ध हो सकते हैं। चक्रों में पहले चक्र मूलाधार चक्र पर ध्यान करके हम सत्सत् विवेक व बोध प्राप्त करते हैं जिससे हमें अपने स्व को पहचानने का अवसर मिलता है। ध्यान के दौरान कुंडलिनी शक्ति सभी चक्रों को प्रकाशित करते हुये जब सहस्त्रार का भेदन करती है, ज्ञान चक्षु खुल जाते है। इस ज्ञान चक्षु से हम ईश्वरीय चेतना से अभिभूत होते हैं और सत्य व यथार्थ की अनुभूति होती है। ईश्वरीय साम्राज्य में प्रवेश करने से बढ़कर कोई और ज्ञान नहीं है। हमारे अंदर व्याप्त अंधकार छंटने लगते है और हम अपने को और दूसरों को भी सही प्रकार से देख पाते हैं।
योग कई प्रकार के हैं। पर, सहज योग से कम समय में आत्मसाक्षात्कार पाना संभव होता है।
एक शुद्ध इच्छा लेकर सहज योग से जुड़ें। सहज योग के सेंटर्स पर नये साधकों का हम हृदय से स्वागत करते हैं।
सहज योग के बारे में जानने हेतु हमारा टोल फ्री नंबर है 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं सहज योग पूर्णतया निशुल्क है

