सहजयोग ध्यान से होती है अपने सत्य और असत्य स्वरूप की पहचान

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सहजयोग केवल एक ध्यान पद्धति नहीं, बल्कि आत्मसाक्षात्कार की एक जीवंत प्रक्रिया है। परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी द्वारा स्थापित इस दिव्य साधना में मनुष्य अपने भीतर स्थित कुंडलिनी शक्ति के जागरण के माध्यम से चैतन्य का अनुभव करता है। जब साधक नियमित रूप से सहजयोग ध्यान करता है, तब उसके भीतर एक सूक्ष्म परिवर्तन प्रारंभ होता है। इसी परिवर्तन के साथ “असत्य स्वरूप” की पहचान होने लगती है।
सामान्य जीवन में मनुष्य स्वयं को शरीर, विचार, पद, प्रतिष्ठा और अहंकार तक सीमित मान लेता है। वह बाहरी संसार की वस्तुओं में सुख खोजता है और परिस्थितियों के अनुसार कभी प्रसन्न तो कभी दुखी होता रहता है। परंतु सहजयोग ध्यान के पश्चात साधक धीरे-धीरे अनुभव करता है कि यह सब स्थायी नहीं है। क्रोध, भय, लोभ, ईर्ष्या, असुरक्षा और अहंकार, ये सभी मन की अस्थायी अवस्थाएँ हैं, वास्तविक आत्मस्वरूप नहीं।
जब कुंडलिनी जागृत होकर सहस्रार में चैतन्य प्रवाहित करती है, तब साधक के भीतर साक्षीभाव विकसित होने लगता है। वह अपने विचारों को देखने लगता है, उनसे जुड़ता नहीं। इसी अवस्था में मन के भ्रम और असत्य स्वरूप स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। जो बातें पहले अत्यंत महत्वपूर्ण लगती थीं, वे अब क्षणिक और माया का भाग प्रतीत होने लगती हैं।
सहजयोग में “माया” का अर्थ केवल संसार नहीं, बल्कि वह भ्रम है जो आत्मा और परमचैतन्य के बीच दूरी उत्पन्न करता है। जब ध्यान गहरा होता है, तब यह माया धीरे-धीरे हटने लगती है। साधक अनुभव करता है कि वास्तविक आनंद बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर की शांति और चैतन्य में है।
ध्यान के पश्चात व्यक्ति के व्यवहार में भी परिवर्तन दिखाई देता है। वह अधिक शांत, संतुलित और करुणामय बनता है। प्रतिक्रियाएँ कम होने लगती हैं और क्षमा का भाव बढ़ता है। अब वह दूसरों की कमियों में उलझने के बजाय स्वयं के आत्मचिंतन की ओर अग्रसर होता है। यही सहजयोग की निर्मल चेतना का प्रभाव है।
सहजयोग सिखाता है कि सत्य को केवल पढ़ा या समझा नहीं जा सकता, बल्कि उसे अनुभव किया जाता है। जब आत्मा का प्रकाश भीतर प्रकट होता है, तब असत्य अपने आप नष्ट होने लगता है। उस समय साधक को यह अनुभव होता है कि वास्तविक पहचान न शरीर है, न मन, बल्कि शुद्ध आत्मा है।
अंततः सहजयोग ध्यान मनुष्य को असत्य और भ्रम की सीमाओं से निकालकर आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाता है। आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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