सहज योग ध्यान : विचार-शून्य निर्विकल्प समाधि का सहज मार्ग

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विचार शून्यता (Thoughtless Awareness) वह स्थिति है जहाँ मन पूरी तरह शांत और सचेत रहता है। यही अवस्था गहन ध्यान की अवस्था है जो हमें स्वयं से और पूरे ब्रम्हांड में फैले परा शक्ति से जोड़ता है।  हमारी इस स्थिति की अभिव्यक्ति हमारे मध्य नाड़ी तंत्र पर होती है। 
ध्यान मार्ग पर अग्रसर सभी साधकों को निर्विचार होना सबसे कठिन लगता है।  हम सप्रयास ध्यान करते हैं तो असहजता महसूस होती है और  विचार पीछा नहीं छोड़ते।  इसका सबसे बड़ा कारण हमारा संतुलित ना होना ही होता है। सहजयोग की ध्यान पद्धति हमारी बाईं ओर की ईडा नाड़ी और दाहिनी ओर की पिंगला नाड़ी को संतुलित करती है।  बाईं ओर की नाड़ी हमारे भूतकाल की और दाहिनी ओर की नाड़ी हमारे भविष्य काल की नाड़ी है। पंचतत्वों के प्रभाव से जब नाड़ियां संतुलित होती हैं।  तब हमारे मन को अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त करती है जिससे कुंडलिनी शक्ति का सहज जागरण होता है, मध्य नाड़ी में स्थित चक्र भी संतुलित होते  हैं और हमारे अंदर परा शक्ति के चैतन्य का बहाव होने लगता है। यह एक बहुत ही सुखद अवस्था है, जिसकी अनुभूति हमें ध्यान मार्ग के उच्च अवस्था में ले जाता है। 
   अत: हमारे अंदर स्थित   कुंडलिनी शक्ति का जागरण आत्मसाक्षात्कार  के माध्यम से होना आवश्यक  है, तभी हम 'निर्विकल्प समाधि' की इस अवस्था का अनुभव कर सकते हैं, जो वास्तविक मानसिक शांति और आनंद का स्रोत है। यही हमारे आंतरिक विकास की प्रक्रिया है और हम मानव का, सर्वोच्च गौरव‌ आत्मस्वरुप को पा लेते हैं।   
इस अवस्था में हम वर्तमान (Present) में होते हैं।  हम घटनाओं और दृश्यों को देखते हैं लेकिन विचारों में नहीं उलझते। यह साक्षी भाव है जो हमारे अंदर जागृत हो जाता है। सातों चक्र के अलग अलग गुण हैं।  चक्र की जागृति के पश्चात यह गुण हममें स्वयं ही प्रगट होने लगते हैं। आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800-2700-800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं। सहजयोग पूर्णतया निशुल्क है।

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