अकेलेपन के अवसाद को दूर करता है सहजयोग का सामूहिकता का सिद्धांत

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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मनुष्यों के साथ, मनुष्यों के बीच रहकर ही वो सामान्य जीवन जी सकता है।  अकेलापन इंसान को अंदर से खोखला करना शुरू कर देता है, जिससे वो‌ डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी से ग्रसित होने लगता है।  इंसान किसी न किसी कारण से ही समाज से दूर होने लगता है जैसे- किसी से गहरा आघात पाना, किसी प्रयास में असफल होना, पारिवारिक अशांति, आर्थिक या शारीरिक तकलीफ इत्यादि मनुष्य को अकेलेपन का शिकार बना देता है। 
निराशाजनक स्थिति में जब मनुष्य खालीपन अनुभव करता है तब कुछ दिनों तक उसे वह खालीपन अच्छा लगता है क्योंकि उसे  लोगों का सामना नहीं करना होता, किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना पड़ता है।  पर, धीरे धीरे यही खालीपन की स्थिति उसे गहन अंधकार में ढकेलने लगती है। यह स्थिति इतनी धीरे-धीरे  आती है कि मनुष्य को पता ही नहीं चलता। 
अपने परिवार समाज में लोगों से मिलजुल कर जब हम अपनी समस्या या दुख किसी से बांटते हैं, तब भले ही हमें उनकी सहायता ना मिले पर अपने मन की बात किसी के सामने रखकर हम अपनी पीड़ा से थोड़ी सी राहत तो पा ही लेते हैं।  और.. जहाँ तक मदद की बात है हमसे ज्यादा हमारी मदद कोई और नहीं कर सकता है। 
सहज ध्यान योग में सामूहिकता का सबसे ज्यादा महत्व है।  सहज योग पद्धति से जब हम ध्यानावस्था में होते हैं तब कुंडलिनी जागरण से हमारे अंदर प्रवाहित होने वाले चैतन्य, हमारे साथ बैठे साधकों के चैतन्य से मिल जाता है और उसका प्रभाव दुगुना हो जाता है। ईश्वर से एकाकारिता इस चैतन्य को इतनी शक्तिशाली बना देती है कि यदि साथ बैठे साधकों में यदि नकारात्मकता होगी तो धीरे धीरे वह उस  नकारात्मकता से मुक्ति पा लेगा।  यही वो कारण है जिसके कारण सहज योग में सामूहिकता की अनिवार्यता है। 
 और जैसे कि पहले ही कहा गया है कि स्वयं की मदद सिर्फ हम ही कर सकते हैं।  किसी भी स्थिति में नकारात्मकता को अंगीकार कर अकेलेपन को स्वीकार नहीं करना है।   ध्यान योग सीखकर, ध्यान मे बैठकर, स्वयं की स्थिति को  स्वयं समझना और सकारात्मक ऊर्जा से स्वयं को जोड़ने का प्रयास सभी को करना चाहिए क्योंकि हम सिर्फ अपने लिए नहीं अपने परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।  अत: चलिए सहज योग से जुड़ते हैं और अपने अंदर के सद्गुणों को पहचान कर, ईश्वर ने जो सुंदर जीवन दिया है, उसकी कद्र करते हुए शांतिपूर्ण, खुशहाल जीवन जीने के लिये स्वयं पहल करते हैं। 
सहज योग के बारे में जानकारी हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 अथवा  www.sahajayoga.org.in  से प्राप्त सकते हैं ।

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