द्वितीय नवरात्रि स्वाधिष्ठान चक्र के संतुलन का दिव्य अवसर
“दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”
नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। मां का यह स्वरूप तप, त्याग, संयम, सदाचार और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित होता है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना साधक को आत्मानुशासन, दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देती है।
स्वाधिष्ठान चक्र, ज्ञान, विवेक और सृजनात्मकता का केंद्र
सहजयोग की आध्यात्मिक शिक्षाओं के अनुसार, स्वाधिष्ठान चक्र का संबंध सृजनात्मकता, कलात्मकता, ज्ञान, विवेक और विचारों की शुद्धता से है। परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी ने इस चक्र के महत्व को समझाते हुए बताया है कि ब्रह्मदेव की सृजनात्मक शक्ति मां सरस्वती के रूप में यहां अभिव्यक्त होती है। मां सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।
श्री माताजी की शिक्षाओं के अनुसार, सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकीय विद्वत्ता तक सीमित नहीं है। उसमें संगीत की मधुरता, सृजनात्मकता, विवेक और परमात्मा के प्रति श्रद्धा का समावेश भी आवश्यक है। मां सरस्वती की वीणा जीवन में सामंजस्य और मधुरता, माला परमात्मा के प्रति श्रद्धा तथा ज्ञान की पुस्तक सत्य की खोज का संदेश देती है।
संतुलित स्वाधिष्ठान चक्र मानसिक व भावनात्मक स्थिरता का आधार
सहजयोग के अनुसार, स्वाधिष्ठान चक्र के असंतुलन का संबंध मानसिक एवं भावनात्मक अस्थिरता और अत्यधिक विचारों में उलझे रहने जैसी प्रवृत्तियों से जोड़ा जाता है। ध्यान और आत्मचिंतन के अभ्यास से व्यक्ति अपने भीतर शांति, सहजता और विवेक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
यह नवरात्रि अपने भीतर की दिव्य शक्ति को पहचानने और आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ने का विशेष अवसर है। सहजयोग ध्यान एवं कुंडलिनी जागरण की आध्यात्मिक पद्धति आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने तथा विचारों से परे ध्यान की अवस्था का अनुभव करने की दिशा में प्रेरित करती है।
आइए, इस द्वितीय नवरात्रि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ ज्ञान, सृजनात्मकता, विवेक और आंतरिक शांति को अपने जीवन में अपनाएं।
आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने एवं सहजयोग ध्यान के लिए अपने नजदीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 270 0800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं सहज योग पूर्णतः निःशुल्क है।

