पहली ही बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल: खकनार के चिड़ियामाल में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर

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गरीब आदिवासियों से वसूला गाड़ी का भाड़ा ओर मजदूरों की मजदूरी
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
बुरहानपुर। शासन-प्रशासन एक तरफ जहां सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों में रोशनी पहुंचाने के लिए लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रहा है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर बैठे कुछ ठेकेदारों की लापरवाही और कथित मनमानी के चलते सरकार की इन जनहितैषी योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चिड़ियामॉल के '12 नंबर गेट' के पास स्थित पहाड़ी क्षेत्र से सामने आया है। यहां लगभग एक महीना पहले लगाए गए बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर पहली ही बारिश का लोड भी नहीं सह पाए और भरभरा कर जमींदोज हो गए।

मात्र 1 से 2 फीट गहरे गड्ढे, गुणवत्ता पर खड़े हुए गंभीर सवाल

विभागीय नियमों और तकनीकी मापदंडों के अनुसार, लगभग 25 से 30 फीट लंबे और करीब 2 क्विंटल वजनी बिजली के भारी-भरकम पोल को मजबूती से खड़ा करने के लिए मानक कम से कम  4 से 5 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाना अनिवार्य है। लेकिन ग्राम  चिड़ियामॉल के इस पहाड़ी इलाके में ठेकेदार के लोगों  द्वारा कथित रूप से महज 1 से 2 फीट गहरा गड्ढा खोदकर पोल खड़े कर दिए गए। नतीजा यह हुआ कि जून माह की पहली मानसूनी बारिश और हवा के झोंके को भी ये पोल बर्दाश्त नहीं कर सके। कई पोल उखड़ गए तो कुछ बीच में से ही टूट गए, जो काम की घटिया गुणवत्ता को साफ बयां कर रहे हैं। गनीमत रही कि उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, वरना कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।

"हमसे भाड़ा लिया, मजदूरी भी कराई और मुर्गे भी ले गए" — ग्रामीणों का फूटा दर्द

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू आर्थिक और व्यावहारिक शोषण का है। जब इस संबंध में स्थानीय ग्रामीण आदिवासियों से बात की गई, तो उनका दर्द छलक उठा।

राम जायसवाल ग्रामीण : "साहब, हमसे कहा गया कि तुम्हें 24 घंटे बिजली मिलेगी। इसके बदले में सभी क्षेत्र वासियों गरीब आदिवासीयो सेबिजली के पोल और ट्रांसफार्मर लाने-ले जाने का भाड़ा वसूला गया। इतना ही नहीं सहयोग के नाम से , हमसे भी काम करवाया पोल खड़े करवाए, लेकिन हमें हमारी मजदूरी का एक रुपया नहीं दिया गया। उल्टा काम अच्छा करने और जल्दी बिजली चालू करने के नाम पर हमसे 8 से 10 मुर्गे लेकर पार्टी भी की गई 

सुरेश ग्रामीण :  "हम लोग आज भी अंधेरे में, दीपक और चिमनी की रोशनी में रहने को मजबूर हैं। सरकार जब पूरा पैसा दे रही है, पहले हम सभी से 500 - 500 रुपए लिए जिसके बाद हमसे मीटर लगाने के नाम पर भी 200-200 रुपए सभी से नगद क्यों लिए गए?
ओर काम मजदूरों को मजदूरी भी हम सभी से की गई हमारे साथ धोखा हुआ है, पहली ही बारिश में सब गिर गया।"अब बारिश की फसल लगाने के लिए हमारा काम बहुत लेट हो रहा है जमीन तैयार नहीं कर पा रहे है l अब शासन ओर प्रशासन से ग्रामीण जल्दी इस दिक्कत से निजात दिलवाने की मांग कर रहे हैं l 

बड़ा सवाल: जब सरकार दे रही है बजट, तो आदिवासियों से वसूली क्यों ?

नियमों के मुताबिक, बिजली घर-घर पहुंचाने, पोल परिवहन करने और मजदूरों को भुगतान करने की पूरी राशि सरकार अपने कोटे से ठेकेदार को जारी करती है। ऐसे में इन गरीब और सीधे-साधे आदिवासियों से भाड़े, मजदूरी और मीटर के नाम पर की गई वसूली कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद विद्युत विभाग के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इन ठेकेदारों के खिलाफ क्या रुख अपनाता है? क्या ऐसे ठेकेदारों का लाइसेंस निरस्त कर इन गरीब आदिवासियों को न्याय दिलाया जाएगा, या फिर इस भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल दिया जाएगा? यह क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या कहा विभागीय अधिकरी खकनार के राम पालवी ने
 यह कार्य धरती आभा योजना अंतर्गत किया है ठेकेदार ने टूटा हुआ बताया गया है जबकि गड्ढे कम गड़े होने के कारण पोल उखड़ गए हैं जिसका काम सही नहीं हुआ है मैं खुद भी देखकर आया हूं जिसका भुगतान भी नहीं हुआ ओर सर्वे भी किया हुआ है  उससे पहले ही सारे पोल गिर गए हैं और काम भी पूरा घटिया किया है अब उच्चाधिकारी से बात करता हूं फिर देखते हैं क्या कार्यवाही करना चाहिए l

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