जल ही जीवन है, लेकिन जब यही जीवनदायिनी धारा लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनने लगे तो चिंता स्वाभाविक है

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शिवपुरी जिले के करैरा नगर में संचालित अनेक आरओ वाटर प्लांटों की कार्यप्रणाली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। नगरवासियों का आरोप है कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर कुछ वाटर प्लांट संचालक केवल मुनाफाखोरी में लगे हुए हैं, जबकि पानी की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
बताया जा रहा है कि नगर में वितरित किए जा रहे आरओ जल की नियमित जांच नहीं हो रही है। पानी में आवश्यक खनिज तत्वों की उपलब्धता, टीडीएस का मानक स्तर, स्वच्छता और शुद्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की जा रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह आशंका बढ़ रही है कि जिस पानी को वे स्वास्थ्यवर्धक समझकर पी रहे हैं, कहीं वही उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं डाल रहा।
नगर के विभिन्न क्षेत्रों में केम्परों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन कई स्थानों पर संचालित आरओ प्लांटों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जल भंडारण टंकियों की सफाई, मशीनों का रखरखाव, गुणवत्ता परीक्षण और लाइसेंस संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कुछ जिम्मेदार प्लांट संचालक गुणवत्ता और शुद्धता को प्राथमिकता देते हुए लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन अनेक संचालकों की लापरवाही पूरे क्षेत्र की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से भी प्रभावी निगरानी दिखाई नहीं दे रही। आमतौर पर किसी बड़ी घटना या जनस्वास्थ्य संकट के बाद ही कार्रवाई की कवायद शुरू होती है, जबकि आवश्यकता समय रहते निरीक्षण और नियंत्रण की है। जनस्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर प्रशासनिक उदासीनता लोगों की चिंता को और बढ़ा रही है।
नगरवासियों का कहना है कि आरओ प्लांट संचालकों की प्राथमिकता केवल व्यवसायिक लाभ तक सीमित होती जा रही है। पानी को ठंडा कर बाजार में पहुंचा देना ही मानो उनका उद्देश्य बन गया है, जबकि जनता को मिलने वाले जल की गुणवत्ता और उसके स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों की कोई गंभीर चिंता दिखाई नहीं देती।
जनहित में आवश्यक है कि संबंधित विभाग नगर के सभी आरओ वाटर प्लांटों का नियमित निरीक्षण कराएं, पानी की गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच कराई जाए तथा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। क्योंकि शुद्ध पेयजल केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार और स्वस्थ समाज की आधारशिला है।
यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकती है।

रणजीत टाईम्सशिवपुरी जिला ब्यूरो चीफ हेमंत भार्गव

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