लाठियां उठीं तो कांप उठे शराब के अड्डे ,शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई, तो आदिवासी महिलाओं ने खुद संभाला मोर्चा; महुआ और कच्ची शराब सड़क पर बहाई

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अतुल जैन 
खनियाधाना । वर्षों से गांव की खुशियों को निगल रहे अवैध कच्ची शराब के कारोबार के खिलाफ आखिरकार आदिवासी महिलाओं का धैर्य टूट गया। गुरुवार को खनियाधाना थाना क्षेत्र के लगभग दो हजार की आबादी वाले कफार गांव में महिलाओं ने ऐसा साहसिक कदम उठाया, जिसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हाथों में लाठियां लेकर सैकड़ों महिलाएं एकजुट हुईं और गांव में संचालित अवैध शराब के ठिकानों पर धावा बोल दिया। महिलाओं ने मौके पर रखे महुआ, तैयार कच्ची शराब और शराब बनाने के उपकरणों को नष्ट कर दिया तथा बड़ी मात्रा में शराब और महुआ सड़क पर फेंक दिया। पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिलाओं का गुस्सा इतना अधिक था कि शराब बनाने वालों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। महिलाएं सीधे उन स्थानों पर पहुंचीं, जहां लंबे समय से अवैध शराब तैयार की जा रही थी। देखते ही देखते शराब के अड्डे तहस-नहस हो गए और गांव में हड़कंप मच गया। कार्रवाई में शामिल महिलाओं ने कहा कि गांव में वर्षों से खुलेआम कच्ची शराब बनाई और बेची जा रही है। इसके कारण पुरुषों में शराब की लत बढ़ती जा रही है। रोजाना शराब पीकर घर लौटने वाले लोगों की वजह से परिवारों में झगड़े, महिलाओं के साथ मारपीट, घरेलू हिंसा और आर्थिक संकट आम बात हो गई है। मेहनत की कमाई शराब में बर्बाद हो रही है और बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। महिलाओं ने कहा कि अब वे अपने परिवार और गांव को बर्बाद नहीं होने देंगी। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस और आबकारी विभाग से लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। अवैध शराब का कारोबार लगातार चलता रहा। जब प्रशासन ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, तब महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभालने का निर्णय लिया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में वीरन आदिवासी, जितेंद्र सहित कुछ अन्य लोग तीन-चार अलग-अलग स्थानों पर कच्ची शराब का निर्माण कर रहे थे। महिलाओं ने इन सभी स्थानों पर पहुंचकर शराब बनाने की भट्टियां, ड्रम, बर्तन और अन्य सामग्री तोड़ दी तथा तैयार शराब और महुआ नष्ट कर दिया। बताया गया कि 12 जुलाई को आदिवासी सहरिया संगठन की बैठक में गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ कि आदिवासी समाज का कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई शराब पीते हुए पाया गया तो उस पर 5,100 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। साथ ही समिति ने यह भी तय किया था कि गांव में कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ सामूहिक रूप से कार्रवाई कराई जाएगी। महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि गांव में दोबारा अवैध शराब का कारोबार शुरू हुआ तो वे पहले से अधिक संख्या में एकजुट होकर फिर कार्रवाई करेंगी। उनका कहना है कि गांव को नशामुक्त बनाने की यह लड़ाई अब किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी।
(इनका कहना है)
घटना की पूर्व जानकारी नहीं थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल को गांव भेजा जा रहा है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि अवैध शराब का निर्माण पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
(केदार सिंह यादव, थाना प्रभारी खनियांधाना)

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