जैन कौन है...
लाओत्से (Lao Tzu / ) की बात कर करते हैं।
यह बहुत प्रसिद्ध कहानी है -
लाओत्से चीन के महान दार्शनिक, ताओ धर्म के संस्थापक। मरते समय उन्होंने अपने शिष्यों से कहा -
"मैं जीवन में कभी किसी से नहीं हारा।"
शिष्य आपस में कहने लगे - ये कैसी बात है? आदमी कभी भी नहीं हारे यह नहीं हो सकता
तब लाओत्से ने हंस कर कहा -
"मैंने जीवन में कभी किसी से मुकाबला ही नहीं किया, इसलिए कभी हारा भी नहीं। जो लड़ेगा ही नहीं, वो हारेगा कैसे?"
और यहीं से जैन धर्म से जुड़ाव है।
जैन धर्म में भी यही सार है -
जैन का अर्थ ही है - जिसने अपनी इंद्रियों को जीत लिया। जैन किसी दूसरे से नहीं लड़ता, अपने राग-द्वेष, क्रोध, अहंकार से लड़ता है।
जब आप किसी से तुलना / प्रतिस्पर्धा ही नहीं करते, तो हार-जीत खत्म हो जाती है। यही अपरिग्रह और अनेकांतवाद है।
इसीलिए कहा जाता है - सच्चा जैन वही है जिसने जीवन में किसी से मुकाबला नहीं किया, सिर्फ खुद को जीता।

