Category : Dharm

अपूर्णता के भाव की समाप्ति ही ईश्वर का सामीप्य है

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ईश्वर प्रदत्त इस प्रकृति व मानव मात्र के जीवन को सुंदर बनाना ईश्वर का ही कार्य है, क्योंकि जिस चीज को ईश्वर ने ही निर्मित किया है उसमें बदलाव लाना हमारे हाथ में नहींं।   फिर यह कैसे और क्यों कहा जाता ...

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तप से हमारे सुप्त संस्कारों का जागरण होता है

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तपस्या भी मानसिक, वाचिक और कर्म आधारित है। मन को सभी इंद्रियों व उनके सुख में जाने से रोकना मानसिक तप है। व्यर्थ नहीं बोलना और मौन रखना वाचिक तप है। किसी इच्छापूर्ति या पाने की आकांक्षा हेतु व्रत रखना...

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