Category : Dharm

सहजयोग ध्यान से होती है अपने सत्य और असत्य स्वरूप की पहचान

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सहजयोग केवल एक ध्यान पद्धति नहीं, बल्कि आत्मसाक्षात्कार की एक जीवंत प्रक्रिया है। परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी द्वारा स्थापित इस दिव्य साधना में मनुष्य अपने भीतर स्थित कुंडलिनी शक्ति के जागरण के...

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भक्ति में भय अथवा अहंकार नहीं होता

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ज्ञान रुपी चक्षु कोई भी जन्म से ही लेकर नहीं पैदा होता। और न ही इसे कोई स्वयं अपने बलबूते पर धारण कर सकता है। इसे धारण करने के लिए किसी ज्ञानी का सानिध्य जरूरी है। यहां तक कि रामचंद्र जी जैसे अवतरित म...

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