Category : Dharm

सहज योग ध्यान से हम स्वयं के बंधन से भी मुक्त होते हैं

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स्वंय के बंधन से मुक्त होने का अर्थ है अपनी आत्मा को हर बोझ से मुक्त करके आत्म स्वछंदता प्राप्त करना।   आत्म स्वछंदता का अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि हम अपनी जिम्मेदारियों से  विमुख होकर जीवन बिताने की क...

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व्यक्तित्व में त्रिगुणों (सत-रज-तम) को संतुलित करता है सहजयोग

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हमारा सामान्य गृहस्थ जीवन यापन करते समय हम देखते हैं कि सारा संसार त्रिगुणों से आवृत्त है। ये तीन गुण सत्व, रज और तम हैं। पंच महाभूतों से बने हुए हमारे शरीर में ये तीन गुण अपना खेल खेलते रहते हैं। जब ...

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