Category : Dharm

आनंद, कस्तूरी के समान हृदय में होता है यह बाह्य में प्राप्त नहीं हो सकता : श्री माताजी

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आपने कस्तूरीमृग की कहानी सुनी होगी । कस्तूरीमृग की नाभि में कस्तूरी होती है, जिसकी सुगंध बड़ी ही मनमोहक होती है ।उस मनभावन सुगंध की चाह में मृग पूरे जंगल की दौड़ लगाता है, थक जाता है परंतु उसे उस सुगं...

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देहबुद्धि से आत्मबुद्धि में स्थित होने की प्रक्रिया है सहजयोग

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यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः। इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥'भगवद्गीता' परमपूज्य श्री माताजी प्रणित सहजयोग अपने जीवन को सर्वांगसुंदर बनानेवाला एक अनुभुतिजन्य ध्यानाविष...

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