सहजयोग, व्यष्टि से समष्टि बनने की आध्यात्मिक यात्रा
अखंमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम् । तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री ...
वर्तमान को दो ही लोग जीते हैं- योगी या भोगी। भोगी वो हैं जो सिर्फ और सिर्फ सांसारिक सुख के लिए जीते हैं। धन कमाना और विलासी जीवन जीना ही उनका उद्देश्य होता है। कालखंड में यदि समय का विभाजन करें तो ...
Read moreकविता — कौन सगा…हर मोड़ पे मिलेगा दगा,इस दुनिया में आखिर कौन है तेरा सगा? जहाँनेता जनता को दे रहा,बेटा बाप को दे रहा,भाई—भाई को दे रहा,पत्नी—पति को दे रही,पति—पत्नी को दे रहा… किस पर करे भरोसा यहाँ इ...
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