Category : Dharm

ज्ञान जनित वाद-विवाद से परे स्वयं को जानने की कला है सहजयोग

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बूझ सरीखी बात हैं, कहन सरीखी नाहि,जेते ज्ञानी देखिये, तेते संसै माहि।उपरोक्त वर्णित दोहे में संत कबीर कहते हैं  कि, आत्मसाक्षात्कार, स्व-स्वरूप की बात तो समझने तथा अनुभव करने की है, यह वादविवाद का विष...

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शुद्ध अंत:करण से ही आनंद का अवरोहण संभव है

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शुद्धि के बिना सिद्धि संभव नहीं है। और, शुद्धि पाने का सहजतम ‌ मार्ग है सहज योग।  सहज योग के अनुसार श्री गणेश‌ का स्थान हमारे मूलाधार चक्र पर है।   श्री गणेश‌ सदैव‌ बाल‌ रुप में हैं और अबोधिता के गुण ...

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