Category : Dharm

स्वयं का परिष्कार ही सहजयोग ध्यान है

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तपस्या भी मानसिक, वाचिक और कर्म आधारित है। मन को सभी इंद्रियों व उनके सुख में जाने से रोकना मानसिक तप है। व्यर्थ नहीं बोलना और मौन रखना वाचिक तप है। किसी इच्छापूर्ति या पाने की आकांक्षा हेतु व्रत रखना...

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सृष्टि में सौंदर्य, आनंद व प्रेम  की अनुभूति ही शिव हैं : श्री माताजी

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श्रावण सोमवार विशेष शिव जी महायोगी हैं और उनके बारे में हम जानते हैं कि वे सदैव ही अपने आनंद में, समाधि में रत रहते हैं। वे सृष्टि के निर्माण की इच्छा तो करते हैं पर निर्माण व विकास की प्रक्रिया के प्...

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